टाइगर हैबिटेट में बन रहे NHAI के रेस्ट-हाउस पर रोक: हाईकोर्ट ने रेस्ट हाउस के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण ... - Dainik Bhaskar

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राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर जिले के गांव धूअरमाला में एनएचआई के प्रस्तावित रेस्ट हाउस के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया हैं। . कोर्ट ने कहा कि यह प्रस्तावित रेस्ट हाउस...

राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर जिले के गांव धूअरमाला में एनएचआई के प्रस्तावित रेस्ट हाउस के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया हैं। . कोर्ट ने कहा कि यह प्रस्तावित रेस्ट हाउस सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एक किलोमीटर अंदर आता हैं। अधिकारियों ने वैकल्पिक जमीन होने के बाद भी उस पर विचार नहीं किया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी एक ही रिकॉर्ड में पहले यह मानें कि जगह प्रतिबंधित क्षेत्र में है और वैकल्पिक स्थान तलाशें, फिर बाद में बिना ठोस कारण उसी जगह को चुन लें, यह स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वन विभाग भी अपने पत्र में साफ कर चुका था कि एक किलोमीटर वाला प्रतिबंध लागू हैं। लेकिन उसके बावजूद हाईवे अथॉरिटी मूल स्थान पर आगे बढ़ी। जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने यह आदेश बुद्दालाल व अन्य किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। 19 किसानों की जमीन का किया था अधिग्रहण याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अक्षय शर्मा ने कोर्ट को बताया कि अक्टूबर 2024 में प्रशासन ने धूअरमाला गांव के 19 किसानों की कृषि भूमि को एनएच-28ए के शाहपुरा-अलवर सेक्शन के विस्तार के लिए अधिग्रहित किया। इस जमीन पर रेस्ट हाउस बनाना प्रस्तावित था। जिसका किसान विरोध कर रहे थे। किसानों का कहना था कि यह जमीन क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एक किलोमीटर के भीतर हैं और सरकार के 2015 के आदेश से इस क्षेत्र में कॉर्मिशियल, औद्योगिक एक्टिविटीज और लैंड कंवर्जन पर पूरी तरह से रोक हैं। अधिग्रहण अधिकारी ने माइंड अप्लाई नहीं किया उन्होने बताया कि पहले 31 जनवरी 2025 को भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने खुद यह माना था कि प्रस्तावित रेस्ट हाउस की जमीन क्रिटिकल टाइगर रिजर्व हैबिटेट के एक किलोमीटर के भीतर हैं और रेस्ट हाउस को दूसरी जगह शिफ्ट करना उचित होगा। इसके बाद फरवरी-मार्च में दूसरी जगह वैकल्पिक जमीन तलाशने की प्रक्रिया भी शुरू हुई। इसके बाद जिला कलक्टर के निर्देश पर वैकल्पिक जगहों का निरीक्षण हुआ और समिति ने गांव बांदरोले में वैकल्पिक जमीन को अधिक उपर्युक्त माना। लेकिन बाद में 6 अक्टूबर 2025 को भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने किसानों की आपत्तियों को खारिज कर दिया। इस पर कोर्ट ने 6 अक्टूबर के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि लगता है कि भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने आपत्तियां खारिज करते हुए अपना माइंड अप्लाई नहीं किया। पब्लिक यूटिलिटी कहने से प्रतिबंध खत्म नहीं हो जाते वहीं एनएचआई की ओर से कहा गया कि यह कोई कॉर्मिशियल प्रोजेक्ट नहीं है। हम हाईवे यूजर्स के लिए पब्लिक यूटिलिटी फैसेलिटी डलवप कर रहे हैं। इस पर अदालत ने कहा कि इस रेस्ट हाउस में फ्यूल स्टेशन और कियोस्क भी शामिल हैं, जिनका स्वरूप कॉमर्शियल हैं। वहीं केवल किसी परियोजना को पब्लिक यूटिलिटी कह देने से उस पर लागू पर्यावरणीय और वन संबंधी कानून खत्म नहीं हो जाते हैं। कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2024 के अधिग्रहण नोटिफिकेशन को उतनी सीमा तक रद्द किया, जितनी सीमा में धूअरमाला की जमीन रेस्ट हाउस के लिए इस्तेमाल की जानी थी। Source: Google Rajasthan

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