सिलेस्वर महादेव मंदिर आस्था का केंद्र: प्राचीन काल में खुदाई में निकला शिवलिंग, शराब पीने और इत्र लगाने पर ... - Dainik Bhaskar

सिलेस्वर महादेव मंदिर आस्था का केंद्र: प्राचीन काल में खुदाई में निकला शिवलिंग, शराब पीने और इत्र लगाने पर ... - Dainik Bhaskar

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जालोर जिले की रानीवाड़ा तहसील के सिलासन गांव में स्थित सिलेस्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और चमत्कारी मान्यताओं के लिए जाना...

जालोर जिले की रानीवाड़ा तहसील के सिलासन गांव में स्थित सिलेस्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और चमत्कारी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। . मंदिर के पुजारी प्रेमाराम रावल के अनुसार प्राचीन काल में खुदाई के दौरान दो शिवलिंग प्राप्त हुए थे। इनमें से एक शिवलिंग को गोल सायला में स्थापित किया गया, जबकि दूसरे शिवलिंग की पूजा-अर्चना सिलासन गांव में शुरू हुई, जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया। सिलेस्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन बावड़ी भी है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। इसके अतिरिक्त, एक विशाल बरगद का वृक्ष भी मंदिर परिसर का हिस्सा है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर की एक अनूठी विशेषता बरगद के वृक्ष पर बना विशाल मधुमक्खियों का छत्ता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मदिरा का सेवन कर या इत्र लगाकर मंदिर परिसर में प्रवेश करता है, तो मधुमक्खियां उस पर हमला कर देती हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रत्येक सोमवार को यहां एक मेला भी आयोजित होता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ग्रामीण भूरसिंह परमार ने बताया कि महाशिवरात्रि पर सिलेस्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, फल-फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से ओत-प्रोत रहता है। Source: Google Rajasthan

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