NEET पेपर लीक में खुलासा! ‘गेस पेपर’ बनाकर 10 राज्यों में फैलाया; टेलीग्राम पर हुआ वायरल फिर सीकर में खुला राज
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3 मई को आयोजित हुई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 12 मई को रद्द कर दिया। एजेंसी ने पेपर लीक की आशंकाओं को देखते हुए यह फैसला लिया।...
3 मई को आयोजित हुई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 12 मई को रद्द कर दिया। एजेंसी ने पेपर लीक की आशंकाओं को देखते हुए यह फैसला लिया। अब नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित किए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, पेपर लीक को छिपाने के लिए असली प्रश्नपत्र को 'गेस पेपर' के रूप में तैयार कर अलग-अलग राज्यों में फैलाया गया, ताकि पहली नजर में यह केवल संभावित प्रश्नों का सेट लगे। बताया जा रहा है कि परीक्षा से करीब दो से तीन सप्ताह पहले ही यह सामग्री छात्रों तक पहुंचने लगी थी। नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ पूरा खेल जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस से बाहर आया। इस मामले में शुभम खैरनार नामक आरोपी का नाम सामने आया है। आरोप है कि उसने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर पेपर को इस तरह तैयार किया कि वह 'गेस पेपर' जैसा दिखाई दे। इसके बाद कथित तौर पर सबसे पहले यह सामग्री पुणे में बेची गई। धीरे-धीरे यह राजस्थान, दिल्ली, बिहार और आंध्र प्रदेश समेत करीब 10 राज्यों तक पहुंच गई। शुरुआती दौर में इसे पैसों के बदले साझा किया गया, लेकिन बाद में कई टेलीग्राम ग्रुप्स पर भी यह तेजी से वायरल हो गया। राजस्थान और केरल कनेक्शन भी आया सामने शुरुआत में यह दावा किया गया कि वायरल पेपर केरल से सीकर पहुंचा, लेकिन जांच में पता चला कि राजस्थान में यह पहले ही पहुंच चुका था। बताया जा रहा है कि राजस्थान में पढ़ने वाले एक छात्र ने अपने केरल में पढ़ रहे दोस्त को यह पेपर भेजा था। बाद में वही पेपर वापस सीकर और झुंझुनूं के कई छात्रों तक पहुंचा। कोचिंग फैकल्टी को मिला था संदिग्ध पेपर परीक्षा के अगले दिन यानी 4 मई को सीकर की एक कोचिंग संस्थान के फिजिक्स शिक्षक को एक छात्र ने संदिग्ध पेपर भेजा। जब शिक्षक ने उसका मिलान किया तो पाया कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के 120 से ज्यादा सवाल वास्तविक NEET परीक्षा से मेल खाते हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें बायोलॉजी के लगभग 90 और केमिस्ट्री के करीब 35 प्रश्न हूबहू समान पाए गए। इसके बाद शिक्षक ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस की सलाह पर मामले की शिकायत NTA को भी भेजी गई। शिकायत के बाद जांच एजेंसियां हुईं सक्रिय 5 और 6 मई के बीच NTA को प्रमाणों के साथ शिकायत सौंपी गई। इसके बाद एजेंसी ने मामले की जानकारी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को दी। जिस छात्र ने शिक्षक को पेपर भेजा था, उसकी निशानदेही पर राकेश मंडावरिया और उसके कुछ साथियों को देहरादून से हिरासत में लिया गया। SOG और CBI की एंट्री से जांच तेज 8 मई को राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने मामले की जांच शुरू की। टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कई छात्रों से पूछताछ की। 12 मई तक करीब 17 से 18 छात्रों से पूछताछ की जा चुकी थी। उद्योग नगर थाना में छात्रों से यह जानने की कोशिश की गई कि उनके पास पेपर कैसे पहुंचा। फिलहाल उन्हें छोड़ दिया गया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर CBI उनसे दोबारा पूछताछ कर सकती है। कोचिंग और पीजी संचालकों पर भी शक सूत्रों के अनुसार, राकेश मंडावरिया के पास परीक्षा से कई दिन पहले ही पेपर पहुंच गया था। वह सीकर की एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्था में काउंसलिंग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ पीजी संचालकों और कोचिंग फैकल्टी के पास भी परीक्षा से पहले यह पेपर पहुंच चुका था। आरोप है कि वहां से इसे कई छात्रों तक साझा किया गया। कितने छात्रों तक पहुंचा पेपर, पता लगाना मुश्किल जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आखिर यह पेपर कितने छात्रों तक पहुंचा। चूंकि यह करीब 10 राज्यों में फैल चुका था, इसलिए इसकी पूरी श्रृंखला का पता लगाना मुश्किल माना जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर CBI ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अब CBI की टीम राजस्थान SOG कार्यालय पहुंच चुकी है और जल्द ही सीकर समेत अन्य स्थानों पर जांच को आगे बढ़ाया जा सकता है। Source: Amar Ujala Raj
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