मुनीर-शहबाज के खिलाफ बलूच नेता का तगड़ा 'दांव', चीन-अमेरिका को लिखा खुला खत, मानेंगे ट्रंप और जिनपिंग? - Navbharat Times
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इस्लामाबाद : बलूच नेता मीर यार ने दुनिया से अपील की है कि पाकिस्तान को आर्थिक और सैन्य मदद ना दी जाए। मीर ने खासतौर से चीन और अमेरिका को याद दिलाया है कि उनकी ओर से की जा रही मदद...
इस्लामाबाद : बलूच नेता मीर यार ने दुनिया से अपील की है कि पाकिस्तान को आर्थिक और सैन्य मदद ना दी जाए। मीर ने खासतौर से चीन और अमेरिका को याद दिलाया है कि उनकी ओर से की जा रही मदद का इस्तेमाल बलूचिस्तान में आम लोगों के खिलाफ हो रहा है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग को खुला खत लिखते हुए अपील की है कि दुनिया के ये दो ताकतवर देश शहबाज शरीफ और असीम मुनीर के सिर से अपना हाथ हटा लें। मीर यार बलूच ने जिनपिंग और ट्रंप के नाम लिखे खत में कहा है कि पाकिस्तानी सेना ने दुनिया से झूठ बोला है और गलत जानकारी फैलाई है। उसने 12 अगस्त को सुराब में हुए हवाई हमलों से इनकार किया, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 30 बेगुनाह बलूच नागरिक मारे गए। पाकिस्तान का झूठ बोलना कोई नई बात नहीं है। वह ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी पर भी दुनिया को गुमराह कर चुका है। 'चीन-अमेरिका ना करें भरोसा' पाकिस्तानी नेतृत्व बलूचिस्तान के हालात और CPEC (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) पर चीन को गुमराह कर रहा है। पाकिस्तान का बलूचिस्तान पर जमीनी नियंत्रण खत्म हो चुका है। पाक आर्मी अमेरिका और चीन में बने लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करके हवाई हमलों के जरिए बलूचों को निशाना बना रही है। ऐसे में जिनपिंग को इस्लामाबाद की मदद पर फिर से सोचना चाहिए। अलगाववादी बलूच नेता मीर ने आगे कहा कि अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहिए और ना ही उसके भ्रष्ट नेतृत्व को मदद देनी चाहिए। बलूचिस्तान अमेरिका से अपील करता है कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली लंबे समय से चली आ रही सैन्य मदद रोकने पर विचार करे। पाक सेना को मिल रही मदद का इस्तेमाल आम लोगों के खिलाफ हो रहा है। पकिस्तान को क्या-क्या मिला मीर ने बताया है कि 'पीस गेट I और II' प्रोग्राम के तहत वॉशिंगटन ने 1983 और 1987 के बीच पाकिस्तान को 40 F-16A/B लड़ाकू विमान दिए थे। साल 2006 में अमेरिका ने नए 5 अरब डॉलर के पैकेज में 18 F-16C/D ब्लॉक 52 विमान, 34 F-16 विमानों का आधुनिकीकरण और AIM-120C मिसाइलें के रखरखाव को मंजूरी दी। इसी तरह चीन ने भी 1960 के दशक से ही पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर सैन्य मदद दी है। इसमें 165 MiG-19 लड़ाकू विमान और अन्य हथियार शामिल थे। इनकी कीमत 1970 के दशक की शुरुआत तक20 करोड़ डॉलर थी। इन विमानों का इस्तेमाल कोहिस्तान मारी और झालवान में बलूचिस्तान आजादी आंदोलन के खिलाफ किया गया था। बलूचिस्तान में हो रही ज्यादती बीते कई दशकों से पाकिस्तान की अलग-अलग सरकारों और सैन्य प्रशासनों ने विदेशी सहयोगियों से मिले सैन्य उपकरणों, विमानों, हथियारों और लॉजिस्टिकल क्षमताओं का इस्तेमाल बलूचिस्तान में आक्रामक अभियानों में किया है। बलूचिस्तान गणराज्य का मानना है कि पाकिस्तान और बलूचिस्तान अलग-अलग देश हैं। मीर के मुताबिक, पाकिस्तान का बलूचिस्तान की जमीन या हवाई क्षेत्र पर कानूनी अधिकार नहीं है। इसलिए हम दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों (चीन-अमेरिका) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से आग्रह करते हैं कि पाकिस्तान जैसे मनमाने ढंग से काम करने वाले देश को सैन्य मदद के नतीजों पर ध्यान दें। लेखक के बारे में रिजवान रिजवान नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका 10 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) कवर कर रहे हैं। अमर उजाला के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से पढ़ाई की है। वैश्विक राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना और उसका भारत पर क्या असर पड़ेगा, यह भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को स्टोरी और वीडियो के जरिए विश्लेषण देना रिजवान की पहली प्राथमिकता रहती है। पत्रकारिता अनुभव: डिजिटल मीडिया में 10 साल से कार्यरत हैं। रिजवान ने साल 2015 में नई दिल्ली में अमर उजाला डॉट कॉम से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। ... और पढ़ें Source: Google World
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