जिया उपाध्याय होगी सबसे कम उम्र की प्रथम राज्य स्तरीय भामाशाह प्रेरक (उपाध्याय परिवार को मिलेगा दसवां भामाशाह प्रेरक सम्मान)

जिया उपाध्याय होगी सबसे कम उम्र की प्रथम राज्य स्तरीय भामाशाह प्रेरक  (उपाध्याय परिवार को मिलेगा दसवां भामाशाह प्रेरक सम्मान)

मनोज पारीक — राजस्थान

मात्र साढ़े 17 साल की उम्र में जिया उपाध्याय सरकारी स्कूलों को 50 लाख से अधिक की मदद दिलाकर राज्य की सबसे युवा 'भामाशाह प्रेरक' बनेंगी। आगामी 29 जून को जयपुर में मुख्यमंत्री उन्हें सम्मानित करेंगे, जिससे उपाध्याय परिवार को अपना 10वां राज्य स्तरीय सम्मान मिलेगा।

राजस्थान सरकार द्वारा सरकारी शिक्षण संस्थाओं में सहयोग प्रदान करने वाले दानदाताओं एवं उन्हें प्रेरित करने वाले महानुभावों को सम्मानित करने हेतु 1995 में राज्य स्तरीय भामाशाह एवं भामाशाह प्रेरक सम्मान की स्थापना की गई। वर्ष 2024-25 तक राज्य स्तर पर कुल 742 भामाशाह प्रेरकों का सम्मान किया गया तथा इस वर्ष 97 प्रेरकों का सम्मान राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा। इसी क्रम मे स्थानीय श्री गांधी बाल निकेतन के संस्थापक सचिव, क्षेत्र के प्रमुख शिक्षाविद् एवं तीन बार राज्य स्तरीय भामाशाह प्रेरक सम्मान से सम्मानित हो चुके स्वर्गीय ऐडवोकेट चम्पालाल उपाध्याय की पौत्री जिया उपाध्याय को भी इस बार मात्र साढ़े सत्रह साल की आयु में आगामी 29 जून 26 को बिड़ला ऑडीटोरियम जयपुर में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह में पचास लाख से अधिक राशि का सहयोग सरकारी स्कूलों को दिलवाने हेतु मुख्यमंत्री द्वारा भामाशाह प्रेरक सम्मान से सम्मानित किया जायेगा। सनद की  इस समारोह के बत्तीस सालों में अब तक चयनित कुल 839 भामाशाह प्रेरकों में जिया उपाध्याय राज्य स्तरीय भामाशाह प्रेरक सम्मान प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की प्रेरक के साथ - साथ सबसे कम उम्र की पहली महिला प्रेरक बनी है जो अपने आप में एक ना टूटने वाली अमिट उपलब्धि है। वही इस आयोजन मे जिया के पिताश्री राजीव उपाध्याय को भी चौथी बार राज्य स्तरीय भामाशाह प्रेरक सम्मान प्रदान किया जाएगा।  उल्लेखनीय है कि क्षेत्र के प्रमुख शिक्षाविद चम्पालाल उपाध्याय द्वारा जीवन पर्यन्त किये गये सेवाकार्यों को जारी रखने की दृष्टि से उनके पुत्र राजीव उपाध्याय ने सरकारी विद्यालयों में निजी विद्यालयों के समान ही आधुनिक तकनीक से शिक्षण प्रदान करने हेतु इंटरेक्टिव बोर्ड परियोजना की शुरूआत 2022 में की थी। उदार भामाशाहों के सहयोग से उन्होंने इस परियोजना का जिलेभर में विस्तार किया जिसके फलस्वरूप आज जिले की 200 से अधिक विद्यार्थी संख्या वाली अधिकांश सरकारी स्कूलों तथा सभी 20 सरकारी कॉलेजों में 3.90 करोड़ की राशि के 360 इंटरेक्टिव बोर्ड से पढ़ाई हो रही है। जिया के अलावा उनके दादा शिक्षाविद् चम्पालाल उपाध्याय तीन बार 2001, 2006, 2011 में, पिता राजीव उपाध्याय चार बार 2023, 2024, 2025 एवं अब 2026 में, माता मीनाक्षी उपाध्याय 2024, एवं बड़ी बहन मृणालिनी उपाध्याय 2025 में राज्य स्तरीय भामाशाह प्रेरक सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। इस साल मिलने वाले दो सम्मानों को मिलाकर यह उपाध्याय परिवार का दसवां राज्य स्तरीय भामाशाह प्रेरक सम्मान होगा।

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