गहलोत का भजनलाल को न्योता: ‘मुख्यमंत्री आवास पर जादू का शो कराएं, मंत्रिमंडल और विधायक भी देखें’

 गहलोत का भजनलाल को न्योता: ‘मुख्यमंत्री आवास पर जादू का शो कराएं, मंत्रिमंडल और विधायक भी देखें’

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मंच पर कुछ सेकंड में असंभव को संभव बना देने वाला जादू दर्शकों के लिए भले ही मनोरंजन हो, लेकिन इस कला के पीछे कलाकारों की वर्षों की मेहनत, तकनीक और बड़ा आर्थिक ढांचा काम करता है।...

मंच पर कुछ सेकंड में असंभव को संभव बना देने वाला जादू दर्शकों के लिए भले ही मनोरंजन हो, लेकिन इस कला के पीछे कलाकारों की वर्षों की मेहनत, तकनीक और बड़ा आर्थिक ढांचा काम करता है। राजस्थान में जादू की इसी पारंपरिक कला को बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जादू को महज मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत बताते हुए इसके संरक्षण के लिए हर जिले में मैजिक अकादमी बनाने की पैरवी की है। गहलोत ने रविवार को अपने आवास पर प्रदेश के प्रमुख जादूगरों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आर्थिक मुश्किलों के बावजूद जादू की कला आज भी जिंदा है। उन्होंने कहा कि सरकार को जादूगरों को केवल मनोरंजन करने वाले कलाकार के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि इस पारंपरिक कला को संरक्षित करने के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार करनी चाहिए। एक शो के पीछे सिर्फ जादू नहीं, बड़ा खर्च भी गहलोत ने जादूगरों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े शो देखकर लोगों को लगता है कि कलाकार लाखों रुपये कमा रहे होंगे, लेकिन पर्दे के पीछे तस्वीर अलग है। जादूगरों को भारी-भरकम उपकरण और सामान ट्रकों में लेकर एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता है। कई कलाकारों के साथ 20 से 30 लोगों का स्टाफ काम करता है। शो नहीं होने के दौरान भी कई जादूगर अपने स्टाफ को बनाए रखते हैं। ऐसे में कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद कलाकार इस पारंपरिक कला को छोड़ नहीं रहे हैं। पुराने जादू के सामान को बचाने की जरूरत गहलोत ने जादू की पुरानी तकनीकों और उपकरणों के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने गुजरात के एक जादूगर का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके निधन के बाद जादू से जुड़ा करोड़ों रुपये का सामान बेच दिया गया। उनका कहना था कि अगर उस समय जादू अकादमी होती तो इस सामान को संग्रहालय या प्रशिक्षण केंद्र में सुरक्षित रखा जा सकता था। उन्होंने कहा कि ऐसी अकादमियों में पुराने जादूगरों की तकनीक, उपकरण और अनुभव को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित किया जा सकता है और नई पीढ़ी को इसका प्रशिक्षण दिया जा सकता है। जीएसटी में राहत की भी मांग, केंद्र से सिफारिश का आग्रह गहलोत ने जादूगरों के सामने जीएसटी को भी बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर आग्रह करेंगे कि राजस्थान सरकार केंद्र से जादू की कला को जीएसटी से मुक्त करने की सिफारिश करे। उनका कहना था कि यदि सरकार आर्थिक और नीतिगत स्तर पर सहयोग देती है तो जादूगर आधुनिक तकनीक के साथ अपनी कला को देश और विदेश के मंच तक ले जा सकते हैं। मुख्यमंत्री आवास पर शो का न्योता, पूरा मंत्रिमंडल देखे जादू गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जादू का शो देखने का न्योता भी दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चाहें तो मुख्यमंत्री आवास पर मैजिक शो कराया जा सकता है और पूरा मंत्रिमंडल व विधायक इसे देख सकते हैं। गहलोत के मुताबिक, जादू केवल हाथ की सफाई नहीं है। इसमें कलाकार का पहनावा, अभिनय, तकनीक, प्रस्तुति और वर्षों का अभ्यास शामिल होता है। इसे समझने के लिए सरकार के प्रतिनिधियों को जादूगरों की कला को करीब से देखना चाहिए। चित्तौड़गढ़ में जुटेंगे 500 से ज्यादा जादूगर जादू की इसी कला को बड़ा मंच देने के लिए 26 से 28 जनवरी तक चित्तौड़गढ़ में देश का बड़ा जादूगर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। आयोजक जूनियर मायावी के अनुसार सम्मेलन के लिए देशभर के 2 हजार से ज्यादा जादूगरों को निमंत्रण भेजा गया है और 500 से अधिक जादूगरों की भागीदारी तय हो चुकी है। विदेशी जादूगर भी इसमें हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के पहले दिन राजस्थान के जादूगरों के बीच प्रतियोगिता होगी और तीन श्रेष्ठ जादूगर चुने जाएंगे। दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय जादूगर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों के अनुसार आम लोगों से शो के लिए कोई टिकट नहीं लिया जाएगा। जोधपुर में खुलेगी जादू अकादमी, सर्टिफाइड कोर्स की भी तैयारी जूनियर मायावी ने बताया कि देश में जादू की कला के लिए फिलहाल व्यवस्थित प्रशिक्षण केंद्रों की कमी है। इसी को देखते हुए जोधपुर में जादू अकादमी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यहां जादू सीखने के साथ सर्टिफाइड कोर्स की सुविधा भी देने की योजना है। अलग-अलग संगठनों को एक मंच पर लाने की तैयारी जादूगरों को संगठित करने की भी तैयारी चल रही है। जूनियर मायावी के मुताबिक, 1972 में जादूगर महासंघ का गठन हुआ था, लेकिन समय के साथ देशभर के जादूगर अलग-अलग संगठनों में बंट गए। अब सभी को एक मंच पर लाने के लिए जादूगर महागठबंधन बनाने की तैयारी है। Source: Amar Ujala Raj

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