ईरानी पुरुषों की लंबाई दुनिया में सबसे ज्यादा बढ़ी, ब्रिटेन-अमेरिका पिछड़े, जानें किस देश की महिलाएं हुईं लंबी - Navbharat Times
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तेहरान : पिछली सदी के दौरान ईरान के पुरुषों की औसत लंबाई में करीब 16.5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। यह सिर्फ कुछ चुनिंदा पुरुषों के साथ नहीं बल्कि तकरीबन पूरी आबादी के साथ हुआ। इस...
तेहरान : पिछली सदी के दौरान ईरान के पुरुषों की औसत लंबाई में करीब 16.5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। यह सिर्फ कुछ चुनिंदा पुरुषों के साथ नहीं बल्कि तकरीबन पूरी आबादी के साथ हुआ। इस सदी (1896 से 1996 तक के 100 साल) के दौरान ब्रिटिश पुरुषों की लंबाई में 11 सेंटीमीटर और अमेरिकी पुरुषों की लंबाई में 6 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। ऐसे में ईरान सबसे आगे रहा। वहीं महिलाओं में दक्षिण कोरिया में लंबाई सबसे ज्यादा बढ़ी है। इसे बेहतर खानपान और दूसरे पहलुओं से जोड़ा गया है। स्पेस डेली ने बताया है कि पुरुषों की लंबाई के बारे में यह जानकारी 2016 के एक पेपर से मिली है। इस पेपर का शीर्षक A century of trends in adult human height (वयस्क इंसानों की लंबाई में एक सदी के ट्रेंड) के नाम से प्रकाशित किया गया। इसे NCD रिस्क फैक्टर कोलैबोरेशन ने eLife जर्नल में पब्लिश किया था। इस रिसर्च टीम का नेतृत्व इंपीरियल कॉलेज लंदन के रिसर्चर कर रहे थे। उन्होंने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर काम किया । ईरान ने मारी बाजी रिसर्च टीम ने 1.86 करोड़ से ज्यादा लोगों पर हुई 1,472 पॉपुलेशन-बेस्ड स्टडीज का कई बार विश्लेषण किया। इसके आधार पर उन्होंने 200 देशों में 1896 और 1996 के बीच पैदा हुए लोगों की औसत वयस्क लंबाई का अनुमान लगाया। इसमें ईरानी पुरुषों की लंबाई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई। 20वीं सदी में ईरानी पुरुषों की लंबाई में बढ़ोतरी 16.5 सेंटीमीटर थी। इसमें 95% क्रेडिबल इंटरवल 13.3 से 19.7 सेंटीमीटर था। महिलाओं के मामले में साउथ कोरियाई महिलाएं सबसे आगे रहीं, जिनकी लंबाई में 20.2 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। ईरान ही क्यों? यह स्टडी बदलाव को मापती है लेकिन कारण नहीं बताती है। रिसर्चर जिस दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं, वह एक जैसी है। इंपीरियल की रिलीज पर कहा गया है कि जो बच्चे अच्छा पोषण पाते हैं और बेहतर माहौल में रहते हैं, वे ज्यादा लंबे होते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान मां की सेहत भी मायने रखती है। हालांकि लंबाई एक संकेत है कोई पक्का नतीजा नहीं। इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर माजिद एजाती ने इस पूरी प्रक्रिया को एक तरह की 'हेल्थ पोर्ट्रेट' (स्वास्थ्य की तस्वीर) के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि यह स्टडी हमें पिछली सदी में देशों की सेहत की तस्वीर को मौटेतौर पर दिखाती है। ये बताती है कि कुछ देशों में औसत लंबाई कम हो रही है, जबकि दूसरे देशों में लोग लंबे हो रहे हैं। लंबाई से क्या पता चलता है, क्या नहीं लंबे लोगों वाले देशों को विजेता और लंबाई कम होने वाले देशों को दुखद स्थिति के तौर पर देखना आसान लगता है। इस नजरिए से असल बात छूट जाती है। असल मुद्दा लंबाई नहीं है। यह एक ऐसी चीज का पैमाना हो सकता है, जिसे हम 100 सालों के दौरान आसानी से नहीं माप सकते। वह है किसी जगह पर बचपन के दौरान मिले हालात। NCD-RisC की एक स्टडी ने बाद में इस चिंता को और साफ किया गया है। इसमें पाया गया कि कई देशों में पांच साल की उम्र में बच्चों की लंबाई और वजन तो ठीक-ठाक था लेकिन स्कूल के दिनों में वे पीछे रह गए। इससे पता चलता है कि स्कूल की उम्र में पोषण और रहने-सहने के हालात भी मायने रखते हैं। लेखक के बारे में रिजवान रिजवान नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका 10 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) कवर कर रहे हैं। अमर उजाला के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से पढ़ाई की है। वैश्विक राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना और उसका भारत पर क्या असर पड़ेगा, यह भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को स्टोरी और वीडियो के जरिए विश्लेषण देना रिजवान की पहली प्राथमिकता रहती है। पत्रकारिता अनुभव: डिजिटल मीडिया में 10 साल से कार्यरत हैं। रिजवान ने साल 2015 में नई दिल्ली में अमर उजाला डॉट कॉम से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। ... और पढ़ें Source: Google World
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