भूमाफियाओ द्वारा पुरातत्त्व शिलालेख को हटाने का आरोप - व्यापारियों ने दिया ज्ञापन

भूमाफियाओ द्वारा पुरातत्त्व शिलालेख को हटाने का आरोप - व्यापारियों ने दिया ज्ञापन

मनोज पारीक — राजस्थान

भूमाफियाओ द्वारा पुरातत्त्व शिलालेख को हटाने का आरोप - व्यापारियों ने दिया ज्ञापन | भूमाफियाओ द्वारा खुर्दबुर्द किया शिलालेख व ज्ञापन देते व्यापारी (विरोध करने पर भूमाफियाओ ने व्यापारियों को दी धमकिया) (नगर सेठ भरत जालान व उनके प्रतिनिधि तापड़िया पर लगाये आरोप)

रतनगढ़ (मनोज पारीक) रतनगढ़ के नगर सेठ कहे जाने वाले जालान परिवार के पुरखो द्वारा सैकड़ो वर्ष पूर्व अपने कुटुंब के नाम को अमर रखने की सोच से रतनगढ़ परकोटे के भीतर वर्तमान मे शहर के मुख्य मार्ग स्टेशन रोड, अशोक स्तम्भ के पास हनुमान भंडार के नाम से एक संस्था स्थापित की थी जिसमे कस्बे के वाशिदो के अगर मांगलिक व सुख दुःख से जुडा कोई कार्य हो और उस बाबत होने वाले आयोजन मे उपयोग मे आने वाले बर्तन व अन्य सामग्री रखते हुये एक विशाल भंडार भवन का निर्माण करवाकर उसमे रतनगढ़ वासियो के लिए बर्तनो सहित आयोजनों के तहत काम मे आने वाली सभी वस्तुए एक ही छत के नीचे उपलब्ध करवाने का सेवा कार्य की शुरुआत की थी। हनुमान वस्तु भंडार किसी वक्त रतनगढ़ की एक महत्वपूर्ण सेवा संस्थान था जिसे आज के समय का कहे तो विशाल टेंट केटरिग हाउस था जिसमे साधरण शुल्क पर मिलने वाले सामान का उपयोग रतनगढ़ के वाशिंदे करते थे। आज से लगभग 20-25 वर्षो पूर्व जालान परिवार द्वारा इस हनुमान भंडार का संचालन कैसे जैसे किया जा रहा था। समय के चक्र के साथ ज्यो ही जमीनो की क़ीमत आसमान छूने लगी वही जालान परिवार की बदली पीढी के वरिसानो ने परिवार की जमीनो व भवनो को बेचने का सिलसिला भी प्रारम्भ कर दिया और शने शने इस परिवार की पुरतत्त्व इतिहास को बया करती अनेको सम्पति बिक गई। वही जालान परिवार ने हनुमान भंडार के भवन को तोड़कर इसका कुछ हिस्सा नवीनकरण की आड़ मे दुकानों की शक्ल मे बदल दिया और शने शने एक एक करके दुकाने भी बिक गई। वही दूसरी और  हनुमान भंडार के ऊपरी तल पर यह भवन किस उदेश्य से बना था उसका संक्षेप मे विवरण प्रकाशित किया हुआ था उस शिलालेख मे यह भवन किस वर्ष किस कार्य बाबत बना था अंकित था और रतनगढ़ के पुरातत्व धरोहर मे था। वही गत वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार के समय पुरे प्रदेश मे पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वें करके पुरानी हवेलियो, भवनो, छत्रियों आदि का रिकॉर्ड संधारण हुआ था जिसमे सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार हनुमान वस्तु भंडार भी सर्वें लिस्ट मे शामिल हुआ था। उक्त पुरातत्व धरोहर के नाम निशान को खुर्दबुर्द कर वर्तमान मे इस कीमती भूमि को विक्रय करने की नीयत से जालान परिवार व उनके प्रतिनिधि द्वारा भूमाफियाओ के साथ मिलकर गुरुवार रात्रि को इस भवन पर लगा प्राचीन शिलालेख को तोड़ फोड़ कर हटा दिया गया। शुक्रवार को जब इसके नीचे संचालित दुकानों के मालिकों को इस घटना का पता लगा तो सभी ने मिलकर रतनगढ़ के उप जिला कलेक्टर एस.डी.एम को एक ज्ञापन देकर हुई घटना की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग करते हुये ज्ञापन मे बताया की जब हमारे द्वारा इसका विरोध किया गया तो जालान परिवार के प्रतिनिधि द्वारा गेंगस्टर व भूमाफियाओ द्वारा हमें डराया धमकाया गया है। ज्ञापन मे गायब हुये शिलालेख को बरामद कर उसे पुनः उसी स्थान पर स्थापित करने की मांग की। दिए ज्ञापन पर महेंद्र, हरीश, विकास, राकेश, विमल सहित दर्जनों व्यापारियों के हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज करवाया। ज्ञापन की प्रतिलिपि देवस्थान विभाग के सचिव, संभागीय आयुक्त बीकानेर व जिला कलेक्टर चूरू को भी प्रेषित की गई है।

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